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मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

दिसंबर 17, 2019

Christmas in india

Christmas in india

Christmas in india
Christmas in india

भारत एक ऐसा देश है जहाँ हजारो त्योहार मनाये जाते है जैसे होली दीवाली ईद आदि । ईसाई समुदाय द्वारा 25 दिसम्बर को मनाया जाने वाला क्रिसमस भी एक महत्व पूर्ण त्योहार है। ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस को यीशू मसीह के जन्मदिवस के रूम में मनाते है ।

Christmas in India celebration


Christmas in india
Christmas in india


क्रिसमस की तैयारियां 24 दिसम्बर को ही शुरू हो जाती है । लोग अनेक प्रकार की वस्तुओं से अपने घर को सजाते है।कभी-कभी लोग अपने घरों को सजाने के लिए आम के पत्तों का इस्तेमाल करते हैं। दक्षिणी भारत में, ईसाई अक्सर अपने पड़ोसियों को दिखाने के लिए अपने घरों की सपाट छतों पर छोटे तेल के जलते मिट्टी के दीपक डालते हैं कि यीशु दुनिया की रोशनी हैं। गोवा में ईसाईयों को क्रिसमस मनाना बहुत पसंद है! गोवा में उनके क्रिसमस के हिस्से के रूप में बहुत सारे 'पश्चिमी' रिवाज हैं क्योंकि गोवा के पुर्तगाल के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं। गोवा में अधिकांश ईसाई कैथोलिक हैं। लोग क्रिसमस से पहले लगभग एक सप्ताह के लिए अपने पड़ोसियों के आसपास कैरोल गाने जाना पसंद करते हैं।

 पसंदीदा मिठाइयों में न्यूरोस (छोटे पेस्ट्री जो सूखे फल और नारियल और तले हुए होते हैं) और डोडोल (टॉफी की तरह जिसमें नारियल और काजू होते हैं) शामिल हैं। ये अन्य मिठाइयाँ अक्सर 'कंसुआड़ा' का हिस्सा होती हैं जब लोग क्रिसमस से पहले मिठाई बनाते हैं और अपने दोस्तों और पड़ोसियों को देते हैं। अधिकांश ईसाई परिवारों में भी मिट्टी की आकृतियाँ हैं।

Christmas in india
Christmas in india


1920 के दशक के दौरान, कनाडा के गायक निर्देशक जेई मिडलटन ने अंग्रेजी में कैरोल को फिर से लिखा था, क्रिसमस की कहानी बताने के लिए पूर्वी वुडलैंड्स से छवियों का उपयोग करते हुए: टूटी हुई छाल का एक लॉज चरनी की जगह लेता है, बच्चा यीशु खरगोश की खाल में लिपटा होता है, शिकारी जगह लेते हैं चरवाहे, और प्रमुख लोमड़ी और ऊदबिलाव के उपहार लाते हैं। लोरेटविले के ह्यूरन-वेंडेट नेशन के दत्तक सदस्य, भाषाविद् जॉन स्टेक्ले द्वारा एक अधिक सटीक अनुवाद, स्पष्ट करता है कि कैरोल को न केवल जल्दी कैथोलिक धर्मान्तरित करने के लिए लिखा गया था, हूरन कन्फेडेरिटी के रूप में यीशु के जन्म की कहानी है।



मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 26, 2019

What is Ajinomoto in hindi / अजीनोमोटो क्या है

What is Ajinomoto / अजीनोमोटो क्या है

अजीनोमोटो सफेद क्रिस्टल पाउडर की दिखाने वाला पदार्थ नमक और चीनी की तरह दिखाई देता है । अजीनोमोटो को हम इसके ब्यापारिक नाम मोनो सोडियम ग्लूटामेट के नाम से जानते है , अजीनोमोटो को हम एमएसजी के नाम से भी जानते है
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दोस्तो बड़े दुख की बात है अजीनोमोटो के उपयोग पर चीन , अमेरिका सहित यूरोप के सभी देशो में पाबंदी है लेकिन भारत में बिना कीसी रोकटोक के होटल, ढाबा , रेस्टोरेंट , डिब्बा बन्द खाद्यपदार्थ आदि हर जगह उपयोग में लाया जा रहा है ।
अजीनोमोटो के प्रयोग से सर दर्द से लेकर कैंसर तक कि बीमारी हो सकती है ।
अजीनोमोटो के पीयोग को लेकर गाइडलाइंस भी जारी है जिसके मुताबिक खाने के समान में एमएसजी की मात्रा केवल .01 पार्ट्स प्रति मिलियन ( पीपीएम) होना चाहिए लेकिम भारत मे इसकी मात्रा 15 से 17 पीपीएम तक पाया जाता है । डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक अगर इसका उपयोग किया गया तो आप को कैंसर भी हो सकता है।

अजीनोमोटो के उपयोग से होने वाली विमारिया


1 रक्तचाप का बढ़ना

अगर आप लगातार अजीनोमोटो का उपयोग अपने भोजन में करते रहे तो आप का रक्तचाप बढ़ सकता है , यही नही अगर आप इसका उपयोग लम्बे समय तक करते रहे तो आप के नर्वस सिस्टम तक पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है ।

2 सिर दर्द

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अजीनोमोटो के उपयोग से आप को सिर दर्द की समस्या भी उतपन्न हो सकती है , अगर आप लंबे समय तक अजीनोमोटो का उपयोग करते ही रहे तो आप के सिर दर्द को माइग्रेन में बदलने में टाइम नही लगेगा ।

3 हार्ट की दिक्कत :


अजीनोमोटो के ज्यादा उपयोग से हार्ट पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है । इसकी वजह से आप के हार्ट की धड़कन भी आगे पीछे हो सकता है । और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है ।

4 प्रेग्नेंसी पर खतरा :

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प्रेंग्नेंसी के दौरान अगर महिलाएं अजीनोमोटो का उपयोग करती है तो उनके स्वाथ्य पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ सकता है । यहां तक कि पैदा होने वाला बच्चा मन्द बुद्धि या अपंग हो सकता है । इसलिए महिलाएं इनका उपयोग भूल कर भी न करे।

5 आंख की रोशनी का कम होना

अगर आप लगातार अजीनोमोटो का उपयोग करते रहे तो आप के आंखों की रोशनी भी कम हो सकती है।

6 अजीनोमोटो आदी बनाती है

अजीनोमोटो का मस्तिष्क पर बहुत बुरा असर पड़ता है । ये आप को आदी बना देती है , जिस प्रकार ड्रग्स आप के मस्तिष्क पर प्रभाव डालती है ठीक, उसी प्रकार अजीनोमोटो  का भी प्रभाव होता है । मतलब अगर आप लगातार ऐसी चीजों का सेवन कर रहे है जिसमे अजीनोमोटो का उयोग किया गया है , तो आप उसके आदी हो जाओगे। और आप को ऐसी चीजें खाना ही पड़ेगा जिसमे अजीनोमोयो का उपयोग हुआ हो ।

7 हड्डियों के लिये नुकसान दायक

अजीनोमोटो हड्डियों के  लिए बहुत ही नुसान दायक है , यह हड्डियों को धीरे - धीरे कम जोर कर देता है और हड्डियों से कैल्शियम को भी कम कर देता है
प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एमएसजी
अजीनोमोटो का स्वाद मनुष्य के लिए कोई नया नही है , क्यो की गाय के दूध से भी ज्यादा मां के दूध में एमएसजी अथार्त अजीनोमोटो पाया जाता है । जिसका स्वाद मनुष्य को पैदा होते ही मिलता है , अगर हम सब्जियों की बात करे तो , लगभग - लगभग सभी सब्जियों में एमएसजी पाया जाता है , लेकिन टमाटर में सबसे ज्यादा एमएसजी पाया जाता है ।

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शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 16, 2019

Types of disease in hindi / बीमारियों के प्रकार

Types of disease in hindi / बीमारियों के प्रकार


मानव शरीर मे बीमारिया दो प्रकार की होती है एक वे बीमारिया जो किसी जीवाणु (Bacteria) के कारण उत्पन्न होती है , और दूसरी बीमारिया जो हमारे असन्तुलित खान पान के कारण उत्पन्न होती है । आइये बिस्तार से जानते है

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1 वे विमारिया जिनकी उत्तपत्ति किसी जीवाणु , पैथोजन, वायरस, फंगस आदि से होती है , जैसे  क्षय रोग ( टी. बी.) , टायफाईड, टिटेनस, मलेरिया, न्यूमोनिया आदि ।

इन बीमारियों की तीन विशेषताएं हैं -


 (A) इन बीमारियों के कारणों का पता परीक्षणों से आसानी से लगाया जा सकता है ।
(B) इन बीमारियों के कारणों का पता लग जाता है इस लिए इनको ठीक करने की दवाये भी विकसित की जा चुकी है
(C)  इन बीमारियों को जल्द ही अस्थाई रूप से ठीक जा सकती है ।

2 वे जिनकी उत्तपत्ति किसी भी जीवाणु , वायरस , फंगस


आदि से कभी भी नही होती । जैसे - अम्लपित्त (Stomach Acidity) , दमा (Asthma) , गठिया , जोड़ो का दर्द (Arthritis) , कर्क रोग (Cancer) , कब्ज (Constipation),  मधुमेय (Dibetes), हृदय रोग (Heart Problems, Coronary Artery Booking) , बवासीर, भगन्दर, आधासीसी (Migraine) ,  सिर दर्द , प्रोस्टेट आदि
इन बीमारियों की भी तीन विशेषताएं है -
(A) इन बीमारियों के कारणों का पता नही लग पाता ।
(B) क्योकि इन बीमारियों के कारण का पता नही लग पाता , तो इनको ठीक करने की दवा भी विकसित नही की जा सकती।
(C) इनमे से कोई भी बीमारी एक बार हो जाय तो उन ब्यक्ति को बीमारी होने के दिन से ले कर चिता पर लेटने वाले दिन तक औषधि लेनी पड़ती है । इस लिए इन बीमारियों को दीर्घकालीन असाध्य रोगों की ( Chronic ,Long - time, Incurable Diseases) संज्ञा दी गई है।
आज के समय में इन बीमारियों को ठीक करने का जो आधुनिक उपचार उपलब्ध है वह इस प्रकार है ।
जैसे -

1 पेट की अम्लता (Stomach Acidity)


पेट की अम्लता पानी पीने के प्राकृतिक नियमो का पालन न करने से, पाचन तंत्र में किसी खास बिगाड़ व विकारों के कारण उतपन्न होती है । इसे ठीक करने के लिये आधुनिक उपचार के अंतर्गत ब्यक्ति को अल्क़री (क्षार) की गोली दी जाती है । यह क्षार पेट मे जा कर एसिड को नष्ट कर देती है , और हमको लगता है कि हम ठीक हो गये , लेकिन वास्तव में हमारा भारी नुकसान हो जाता है । मतलब जैसे - जैसे आप किसी दवाई द्वारा पेट की एसीडिटी मिटायेंगे वैसे - वैसे पेट एसिड बनाते जायेगा और बीमारी को दीर्घकालीन असाध्य बना देगा । यह समस्या बढ़ते - बढ़ते पेट के अल्सर के रूप में बदल जायेगी और अंत मे कैंसर भी हो सकता है ।

(2) दमा / उच्य रक्तचाप (Asthama, High B.P.)

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ब्लडप्रेशर हो जाने पर ब्यक्ति को ऐसी दवा दी जाती है जिससे रक्तवाहिनियां (blood Vessel) लचीली हो जाएं व उनका ब्यास बढ़ जाए। ब्यास बढ़ जाने पर विज्ञान का दूसरा सिद्धान्त लागू हो जाता है जो इस प्रकार है - force = Pressure/ area ब्यास बढ़ जाने पर Force कम हो जाता है , Force कम हो जाने से उच्च रक्तचाप ( High Blood Pressure) कम हो जाता है । इस दवा से रक्तवाहिनियों का जो कि Elastic  होती है , प्रसरण किया जाता है । रक्तवाहिनियां इलास्टिक होने के कारण 24 घण्टे के भीतर अपने मूल व्यास में आ जाती है । इसलिए चिकित्सक हमें रोज एक गोली लेने की सलाह देते हैं। और अंत में दीर्घकालीन असाध्य बन जाती है ।

(3) हृदय के रक्तवाहिनियों में अवरोध (Coronary Artery Blocking)



हृदय के रक्तवाहिनियों में अवरोध आने पर डॉक्टर लोग बलून एंजियोप्लास्टी करते है , इस क्रिया में रक्तवाहिनी में जिस जगह ब्लाग है उस भाग को फैलाया जाता है । इससे ब्लॉक  तो जस का तस रहता है लेकिन ब्लॉक के बाजू में जगह पैदा की जाती है जिसकी वजह से रक्ताभिसरण शुरू हो जाता है । यहां पर यह बिचार करने की बात है कि ब्लॉक को कोई भी उपचार नही दिया जाता है , व फैलाई हुई रक्तवाहिनी कुछ ही समय में मूल व्यास पर आ जाती है और रक्ताभिसरण रूक जाता है । अब इस अवस्था में चिकित्सक इस ब्लॉक के पास एक स्प्रिंग डाल देते है जिसे स्टेंट कहते हैं। स्टेन्ट डालने के बाद रक्त का प्रवाह उस स्प्रिंग के अंदर से शुरू हो जाता है । इस स्प्रिंग को डालने से 22% व्यक्तियों में फिर से ब्लाक आ जाता है जो Wound healing  व  Foreign Body  के कारण होता है ।

(4) बवासीर , मूलव्याध (Piles)

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 गुदा द्वार के बाहर आए हए मस्सों को शल्य क्रिया द्वारा काट दिया जाता है । यहां पर मूल कारण जो कि गुदाद्वार के अंदर स्थित रक्तवाहिनी व नर्व में होता है, उसे कुछ ना मस्सो को काट देते है जो फिर से बढ़ जाते हैं ।

(5) गठिया, जोड़ो का दर्द ( Arthritis)


इस बीमारी का आधुनिकतम इलाज या तो मरीज को दर्द निवारक औषधि (Pain killer) देना और जब पेन किलर काम करना बंद कर दे तो स्टेरॉइड्स (Steroids) देना जो कि स्वयं में 20 से 25 भयंकर बीमारियों को जन्म देता है

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इस प्रकार आप देखेंगे कि असाध्य बीमारियों के इलाज में बीमारी से उतपन्न होने वाले केवल लक्षणों को ही कुछ समय के लिए दबा दिया जाता है और इसी कारण बीमारी असाध्य और दीर्घकालीन बन जाती है जबकि इनको ठीक करना संभव है ।

दोस्तो अगर देखा जाय तो भगवान ने मनुष्य को सतयुग में जो सरीर दिया था ठीक वही सरीर आज भी है । वही वेग जैसे हँसना, रोना, प्यास आदि , वही संस्थाएं जैसे श्वसन संस्था, रक्ताभिसरण संस्था, मल - मूत्र विसर्जन संस्था आदि बिना किसी अंतर के । जब सतयुग के लोग निरोगी व दीर्घ आयु वाले थे और जीवन के आखरी पल तक स्वावलंबी थे, फिर हम कलियुग के मानवो को इतनी बीमारियाँ क्यों ? हम अल्प आयु के क्यों ?
हम कोई भी मशीन अथवा उपकरण लेते है तो उसका ओपरेटिंग मैनुअल पढ़े बिना उसे नही चलाते , लेकिन यह कैसी विडंबना है कि दुनिया की सबसे जटिल मशीन "मानव देह" जो स्वयं अपने जैसी मशीन को जन्म देने की क्षमता रखती है , को बिना किसी ऑपरेटिंग मैनुअल (गीता, गुरू ग्रंथसाहब, आदि) पढ़े चलाते है





गुरुवार, 31 जनवरी 2019

जनवरी 31, 2019

रिफाइंड नमक , सफेद जहर

रिफंड नमक , सफेद जहर


रिफाइंड नमक एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसका उपयोग हम प्रतिदिन अपने भोजन में करते है । रिफाइंड नमक या आयोडीन नमक हमारे भोजन में उपयोग होने वाला ऐसा धीमा सफेद जहर है जो हजारो बीमारियों को जन्म देता है ।

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रिफाइंड नमक में 98% Nacl (sodium chloride)है , शरीर इसे विजातीय पदार्थ (ऐसा आहार जो शरीर पोषक के लिए उपयोग होने के बाद बच जाता है , यदि शरीर से निष्कासित न हो तो यह विजातीय पदार्थ कहलाता है , जो कि रोग पैदा करता है) के रूप में स्वीकार करता है। रिफाइंड नमक में शरीर के लिए हितकर कोई Natural Balance Of Minerals नही होते ।

रिफाइंड नमक में मिलाये जाने वाले पदार्थ


रिफाइंड नमक में 0.01% पोटेशियम आयोडाइड डाला जाता है जिसका शरीर के लिए कोई खास उपयोग नही होता है । और इसमें शक्कर भी डाली जाती है जो आयोडीन को नमक से बाहर उड़ने देती। यह नमक इकठ्ठा होकर केक न बने इसीलिये इस नमक में सीमेंट बनाने में प्रयुक्त होने वाले रसायन जैसे Tricalcium Phosphate , Calcium Or Magnesium Carbonate , Magnesium Oxide, Sodium Alumino Silicate और Alumino Calcium Silicate भी डाले जाते है।

रिफाइंड नमक के घातक परिणाम


रिफाइंड नमक में प्रयुक्त होने वाले रसायन रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाकर इनमें ब्लॉक्स भी बनाते हैं । परिणामस्वरूप रक्त वाहिनियों में रक्त की कम मात्रा व कम रक्त ऑक्सीजन जीवन रक्षक अंग जैसे हार्ट, किडनी, पाचक , ग्रंन्थि, फेफड़े, पित्ताशय तक पहुँचती हैं वे सब कमजोर हो जाते हैं व उनसे संबन्धित रोग हो जाते हैं। इन्ही कारणों से आज हमारा देश हार्ट अटैक, हार्ट की समस्या, उच्च रक्त चाप, आदि हृदय रोगों के संबंध में विश्व का नंबर एक देश बन चुका है ।

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रिफाइंड नमक के सेवन से होने वाली बीमारियाँ


1 - उच्च रक्त चाप , हार्ट की समस्या होना ।
2 - गुर्दे का खराब होना , गुर्दे की पथरी , पित्ताशय की पथरी
3 - जोड़ो का दर्द , गठिया
4 - नामर्दी (Erectile Dysfunction)
5 - आँख , कान व गले के रोग आदि ।
6 - शरीर में जगह - जगह सूजन
7 - सन्तान का न होना
8 - एल्जाइमर व पार्किन्संस की बीमारी (एल्युमीनियम के कारण)

कोशिकाओं में जाते ही एक ग्राम नमक अपने से 23 गुना ज्यादा पानी कोशिकाओं से खींच लेता है व शरीर पर जगह - जगह सूजन उत्पन्न करता है । कभी - कभी कोशिकाएं पानी के अभाव में मर भी जाती है । कोशिकाओं में उतपन्न हुये पानी के अभाव के कारण, ज्यादा नमक खाने वालों को ज्यादा प्यास लगती है ।

कई वर्षो तक आयोडीन युक्त नमक खाने पर भी थायरॉइड की बीमारी ठीक नही होती अर्थात आयोडीन युक्त नमक थायरॉइड की बीमारी के लिये उपयुक्त नही है।

दोस्तो हमे अपने भोजन में काला नमक या फिर सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए । काला नमक व सेंधा नमक पूरी तरह से प्राकृतिक होते है , इनसे खाना भी स्वादिष्ट बनता है । और हमारे शरीर को किसी भी तरह से कोई हानि नही पहुचाते अपितु लाभ ही पहुचाते है ।

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काला नमक व सेंधा नमक की विशेषताएं


1 - काला नमक व सेंधा नमक में कोई भी रसायन (केमिकल) डाला या निकाला नही जाता । प्राकृतिक होने के कारण ये नमक हमारे शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक है ।
इन हमको में हमारे शरीर के लिए उपयोगी सारे मिनरल मौजूद रहते है।
2 - काला नमक व सेंधा नमक में  Trace Minerals भी पाए जाते है।
3 - इन मिनरलों (मैग्नेशियम, कैल्शियम, पोटेशियम, और लोहा) व Trace Minerals की मौजूदगी में ही सोडियम ठीक से शरीर के आरोग्य को रख पाता है।


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सेंधा व काला नमक की पहचान

सेंधा नमक या फिर काला नमक को जीभ पर रखते ही लार निकलने लगती है , पर रिफाइंड नमक खाने पर केवल वह खट्टा लगता है कोई लार नही निकलती।

शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

जनवरी 25, 2019

चेहरे की सुंदरता कैसे बढ़ाये/beauty tips

चेहरे की  सुंदरता कैसे बढ़ाये


आज हम प्रगति के पथ पर चल रहे हैं, विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस आधुनिक विज्ञान की प्रगति में हमने कम पाया है जबकि खोया अधिक है। हमारे स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है।


हमारे रहने का तौर तरीका , खाना -पीना यहां तक कि हमारी नींद को भी आधुनिक विज्ञान ने प्रभावित किया है परिणाम स्वरूप हमारा स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है और स्वास्थ्य में सबसे बड़ा हिस्सा है वो है सौंदर्य का ।

हम अगर अपनी सुंदरता को बनाये रखना चाहते है तो, हमे प्राकृतिक वस्तुओं का प्रायोग करना पड़ेगा ।इसका सबसे आसान तरीका यह है कि इसकी सुरवात हम अपने घर के आस - पास  पायी जाने वाली घरेलू चीजो का प्रयोग करके कर सकते है इससे हमारा धन भी बचेगा और हम अपनी सुंदरता को कायम भी रख सकेंगे ।


चेहरे की सुंदरता कैसे बढ़ाये/beauty tips

सुंदरता बढाने के कुछ धरेलू उपाय -

1-  5-6 मुनक्का रात को मिट्टी के बर्तन में भिगोकर सुबह चबा-चबाकर खाये । इससे मुहासे दूर होते हैं ।

2- हल्दी पाउडर और दूध मलाई मिलाकर  फेंट लें और चेहरे पर लगाये । आधे घण्टे बाद नींबू का रस लगाकर  चेहरा धो लें  । त्वचा का रूखापन निखरेगा व मुहासें दूर होंगे।

चेहरे की सुंदरता कैसे बढ़ाये/beauty tips
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3- त्रिफला चूर्ण 5 ग्राम रात को दूध के साथ खायें, इससे मुहासे दूर होंगे ।

4- संतरे के छिलके का चूर्ण , आंवला  और हल्दी बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाये व थोड़ी देर बाद चेहरा धो ले । इससे चेहरे में निखार आयेगा ।

5- कच्चे दूध में शहद मिला कर लगाये । इससे झाइयों की समस्या दूर हो जायेगी ।

6- चेहरे को छाछ से धोये । इससे तैलीय त्वचा में निखार आयेगा ।

7- खीरे का रस , नींबू का रस , टमाटर का रस , बराबर मात्रा में मिला कर लगाने से चेहरे का रंग साफ होकर दमकने लगता है ।



चेहरे की सुंदरता कैसे बढ़ाये/beauty tips
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8- मौसमी के रस में शहद मिलाकर चेहरे पर लगाये । बदरंग त्वचा खिल जायेगी।


9- रूखी त्वचा के लिए जो भी कोल्ड क्रीम आप उपयोग में लाते हैं उसमें एक छोटा चम्मच गर्म मलाई के साथ शहद मिलाये । चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें । 5-7 मिनट रहने दे , फिर धो ले ।चेहरे पर रौनक आ जायेगी।


10- चेहरे की सुंदरता को बनाये रखने के लिए सबसे आसान तरीका ज्यादा मात्रा में पानी पीना


11- नीबू का रस व तुलसी के पत्ते का रस समान मात्रा में मिला कर चेहरे पर लगाने चेहरे की झाइयां खत्म हो जाती है ।



12- मक्खन में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर नाभि और ओठो पर लगाने से ओठो पर चमक आ जाती है ।


चेहरे की सुंदरता कैसे बढ़ाये/beauty tips
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दोस्तो अगर हम अपने आप को सुंदर और स्वास्थ्य रखना चाहते है तो हमे अधिक से अधिक प्राकृतिक वस्तुओ का उपयोग करना पड़ेगा ।

 सबसे बड़ी बात हमे अपने जीवन मे संयम रख कर जीवन जीना होगा तभी हम इस आधुनिक विज्ञान के साथ स्वस्थ और खूबसूरत जीवसं का तालमेल कर पायेंगे

मंगलवार, 22 जनवरी 2019

जनवरी 22, 2019

वैलेंटाइन डे क्या है / what is valentine's day

वैलेंटाइन डे क्या है 

What-is-valentine-day
Valentine day

"वैलेंटाइन डे एक ग्लोबल फेस्टिवल है जो लगभग पूरे विश्व में प्रेम पर्व के रूप में 14 फरवरी को मनाया जाता है । "
                              
" वैलेंटाइन डे 14 फरवरी 4098 से यूरोप में संत वैलेंटाइन की याद में मनाया जाता है जो आज एक प्रेम पर्व की सक्ल ले चुका है " 

आइये जानते है वैलेंटाइन डे की पूरी कहानी क्या है - 


आज से लगभग 2000 - 2500 साल पहले रोम ( जो कि यूरोप में है ) में क्लाउडियस (Claudius) नाम का एक राजा हुआ करता था । जो कि बहुत ही क्रूर था , जिसका मानना था कि महिलाएं यूज एन्ड थ्रो के लिए होती है , मतलब आप की जब तक इच्छा कहे किसी महिला का उपयोग अपनी शारिरिक बूख मिटाने के लिए करो, और छोड़ दो ।
 यूरोप (और अमेरिका) के देशों में महिलाओं को रखैल(kept) समझा जाता है । महिलाओ को कभी भी पत्नियों का दर्जा दिया ही नही जाता था । वहां ऐसा एक भी पुरुष नही मिलेगा जिसका सम्बन्ध एक महिला के साथ हो ।

आज भी यूरोप और अमेरिका के लो live in relationship में रहते है ( जो अपने भारत मे भी अपना पैर पसार रहा है ) मतलब बिना साधी के साथ - साथ रहना , और इससे  मन भर जाये तो किसी और के साथ रहने लगो ।

यूरोपीय दार्शनिक प्लेटो का भी यही मानना है , कि एक महिला के साथ जीवन बिताना तो सम्भव ही नही है अर्थात ये वहां की हजारों साल पुरानी परंपरा है ।

जिस समय क्लाउडियस (claudius) रोम का राजा था , उसी समय रोम में एक संत रहते थे जिनका नाम था वैलेंटाइन, धर्म से इशाई थे और एक चर्च में पादरी भी थे । चौथी  शताब्दी के अंत मे और पांचवीं शताब्दी की शुरूवात में भारत का खूब ब्यापार चलता था जिससे वैलेंटाइन के हाथ कही से भारतीय साहित्य लग गया जिसका इन्होंने अध्ययन काफी समय तक किया ।

भारतीय साहित्य का अध्ययन करने के बाद बैलेंटाइन को यह समझ में आ गया कि , सादी कर के रहने में या (live in relationship) बाजारू दुनिया मे कितना अंतर है । भारतीय परंपरा , और जीवन शैली का रहस्य जब जब वैलेंटाइन को समझ आगया तो वे रोम में सादी कर के साथ रहने का प्रचार शुरू कर दिया और लोगो को चर्च में ला के सादी करवा देते थे । इससे पूरे रोम में वैलेंटाइन का प्रभाव काफी बढ़ गया , और वैलेंटाइन को काफी लोग पसंद करने लगे ,और चर्च में आ कर सादी भी करने लगे ।


What-is-valentine-day
valentine day

अब ये कार्य Claudius को पसंद नही आया क्यो की वह तो महिलाओ को रखैल (kept) समझता था, लेकिन वैलेंटाइन ठीक उसका उल्टा कर रहा था । Claudius  रोम का राजा था । उसका ही कानून चलता था वहां पर ।
अतः  Claudius  ने 14 फरवरी 4098 को खुले मैदान में वैलेंटाइन को फांसी दे दी । परिणामस्वरूप वैलेंटाइन के जीवन का अंत हो गया ।
अब जिन - जिन लोगो की वैलेन्टाइन ने सादी करवाई थी उन लोगो को काफी दुख हुआ, तो ओ सारे लोग मिल कर 14 फरवरी 4098 से वैलेंटाइन की याद में वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया। तो इस दिन यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाने लगा , अर्थात वैलेंटाइन डे एक ऐसे ब्यक्ति की याद में मनाया जाता था जो लोगो की शादियाँ करवाते थे।

लेकिन आज वैलेंटाइन डे स्कूलों में, कॉलेजो में, हर जगह एक प्रेम पर्व के रूप में मनाया जाने लगा है ।

वैलेंटाइन डे के  2019 की साप्ताहिक  सूची 

दिनांक                दिन का नाम
7 फरवरी             (Rose Day)  गुलाब देने का दिन
8 फरवरी             (Propose Day) प्रस्ताव रखने का दिन
9 फरवरी             (Chocolate Day) चॉकलेट दिवस
10 फरवरी           (teddy day) देड्डी डे
11फरवरी            (Promise Day) इकरार का दिन
12फरवरी            (Hug Day) आलिंगन करने का दिन
13फरवरी            (Kiss Day) चुम्बन का दिन
14फरवरी            (valentine Day) वैलेंटाइन डे

(Rose Day) गुलाब देने का दिन


वैलेंटाइन सप्ताह के पहले दिन प्रेम व भावना के महकते संयोग रोज डे पर शुभकामनाओ का सिलसिला 12 बजे रात से ही शुरू हो जाता है ।
इस दिन प्रेमी अपनी प्रेमिका को लाल गुलाब भेंट कर अपने बेशुमार प्रेम को व्यक्त करता है।

(Propose Day) प्रस्ताव रखने का दिन


वास्तव में प्यार करना आप को आसान भले ही लगता हो लेकिन प्रपोस करना बहुत ही कठिन होता है । हम भले ही कितनी तैयारी कर ले पर जब हम अपनी प्रेमिका के सामने जाते है तो हम कुछ बोल नही पाते है ।
दोस्तो हम जिन्हें अथाह प्रेम करते है उनको हमेसा खोने का डर बना रहता है इसलिए हम उनके सामने कुछ बोल नही पाते ।
लेकिन Propose Day  के दिन हर प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्रपोज करने का कोई न कोई तरीका निकाल ही लेता है ।

(Chocolate Day ) चॉकलेट दिवस


चॉकलेट दिवस वैलेंटाइन सप्ताह का तीसरा दिन होता है , जो हर आयु वर्ग के लोगो , खास कर के युवा युगल द्वारा 9 फरवरी के दिन एक दूसरे को चॉकलेट का डिब्बा दे कर बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।

(Teddy day)टेड्डी डे


टेड्डी डे 10 फरवरी को मनाया जाता है , इस दिन लोग अपने चाहने वालो को उपहार के रूप में टेड्डी (एक तरह का खिलौना जो एक जंगली भालू की आकृति होती है ) भेंट करके अपने मनो भवो को ब्यक्त करते है ।

(Promise Day) इकरार का दिन


Promise Day (इकरार का दिन) यह दिन वैलेंटाइन के सप्ताह का 5 वां दिन होता है , इस दिन युगल प्रेमी एक दूसरे से जिंदगी भर साथ निभाने का इकरार करते है ।
दोस्तो इस दिन आप को अपने आप से भी एक वादा करना चाहिए कि आप के जितने भी सगे संबंधी (near & dear) है उनके रिस्तो का स्तर उच्चतम शिखर पर कायम रहे । क्यो की आप के जो भी सगे संबंधी (near & dear) है उनकी आप के प्रति कुछ न कुछ उम्मीदे होती है , तो उन उम्मीदों के प्रति खरे उतरने का वादा आप को अपने आप से करना चाहिए ।

Hug day (आलिंगन करने का दिन)




दोस्तो प्यार जताने का सबसे आसान तरीका होता है गले लगाना मतलब आलिंगन करना । दोस्तो आप कितने भी परेशान क्यो न हो अगर कोई अपना आ कर आप को गले लगा लेता है तो आप अपने आप को काफी सुरक्षित महसूस करते है । दोस्तो आलिंगन कई तरह का हो सकता है, जैसे कस कर गले लगाना , दोस्तो का आलिंगन , अनुत्तरित आलिंगन ।
 Hug day प्रेमी युगल की तरफ ही इसारा करता है । इस दिन प्रेमी अपनी प्रेमिका को गले लगा कर उस हर एक पल को भुनाना चाहता है जिससे उसके प्रेम की पराकाष्ठा चरम सीमा पर हो और उसे प्रेम की अनुभूति कराये।

Kiss Day (चुम्मन दिवस)


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valentine day



Kiss Day (चुम्मन दिवस) 13 फरवरी अथार्त वैलेंटाइन डे के एक दिन पहले मनाया जाता है । दोस्तो चुम्मन रोमांस का एक अहम भाग है । चुम्मन प्रेमी के प्रेम के अहसास को बढ़ा है । एक लंबा चुम्मन आप की प्रेमिका को , आप की प्रति समर्पण की भावना को बढ़ा देता है । दोस्तो चुम्मन से आप अपने प्रेम  को रफ्तार तो प्रदान करते ही है साथ ही साथ इसके अपने हेल्थ बेनिफिट्स भी है ।
डॉक्टरों के अनुसार एक रोमांटिक किस (चुम्मन) तनाव कम करने में काफी मदद करता है ।

Valentine Day (वैलेंटाइन डे)

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valentine day 


Rose day , propose day , Chocolate day, Teddy day , Promise day , Hug day and Kiss day, आदि दिनों से होते हुए हम आ पहुचे है उस महा पर्व के दिन में जिसका नाम है प्रेम दिवस अथार्त वैलेंटाइन डे । 
वैलेंटाइन डे हर साल 14 फरवरी को हर प्रेमी युगल द्वारा मनाया जाता है ।


दोस्तो वैलेंटाइन डे पूरी तरह से पाश्चात पर्व है हम भारतीयों को इसका विरोध करना चाहिए , क्यो की वैलेंटाइन डे कही न कही हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा है । सर्म की बात है कि हमारी युवा पीढ़ी 100 प्रतिसत इसमे हिस्सा लेती है ।

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शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

जनवरी 04, 2019

aankho ke rog/आँखों के रोग इन हिंदी

आँखों के रोग 

आँख दुखना , आँखों की सूजन एवं जलन


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आँखों में धूल जाने से या आंखों में किसी संक्रामक बीमारी , अधिक ठंड, अधिक गर्मी, के कारण दर्द होना शुरू हो जाता है और आँखे आ जाती है। इस कारण आंखों से पानी निकलना शुरू हो जाता है। इस दर्द और सूजन को दूर करने के कुछ घरेरू उपाय निम्न हैं - 

1 - हल्दी की गांठ को पत्थर पर पानी के साथ घिसें और सलाई की सहायता से आंखों में लगायें। दर्द और सूजन में आराम मिलेगा ।

2 - सफेद प्याज के रस को आंखों में लगाने से दर्द में काफी राहत मिलती है ।

3 - त्रिफला चूर्ण , घी और शहद मिलाकर खाने से आंखों की बीमारियां दूर होती है । 

4 - देशी गाय का घी आँख में लगाने से जलन दूर होती है ।

5 - गुलाब जल में फूली फिटकरी डालकर आंखों को धोने से जलन एवं सूजन समाप्त होती है । केवल गुलाब जल डालने से भी आंखों में राहत मिलती है ।

6 - शुद्ध देशी गाय के घी में थोड़ी सी काली मिर्च मिलाकर सुबह - शाम सेवन करें काफी राहत मिलेगी ।

7 - तुलसी या बेल के पत्तो का रस भी आँखों डालने से काफी लाभ होता है ।


                                          गुहेरी 


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आँखों की पलको के ऊपर कोने में फुंसी निकल आने को गुहेरी कहते है । यह एक गांठ की तरह होती है जिसमे हल्का - हल्का दर्द भी होता है । 
कुछ घरेलू उपाय अपना कर हम इस समस्या से बड़ी आशानी से छुटकारा पा सकते है - 

1 - इमली के बीजो को पत्थर पर घिसकर लगाने से गुहेरी में आराम मिलता है । 

2 - लौंग को यदि पानी मे घिस कर जिस जगह पर गुहेरी हुई है , उस जगह पर लगाया जाय तो एक से दो दिन में ही गुहेरी पूरी तरह से ठीक हो जाती है ।

3 - बकरी का दूध गुहेरी पर लगाने से भी गुहेरी में काफी आराम मिलता है ।

4 - गुलाब जल में छोटी हरड़ को घिसकर लेप करने से काफी लाभ मिलता है ।

5 - अनार का रस आंखों में डालने से भी काफी राहत मिलती है । 

6 - गुलाब जल में थोड़ा फिटकरी का पानी मिलाकर आंखों  डालने से गुहेरी बैठ जाती है । 

7 - छुहारे की गुठली को सिल पर घिसकर गुहेरी पर लगाने से काफी राहत मिलती है ।

                                    रतौंधी 


रतौंधी एक ऐसी बीमारी है जिसमे मरीज को रात में बिल्कुल दिखाई नही देता लेकिन दिन में ठीक दिखाई देता है ।
रतौंधी होने का मुख्य कारण अत्यधिक धूल , तीव्र प्रकाश और दूषित पर्यावरण है ।
रतौंधी को ठीक करने के लिये कुछ घरेलू उपाय 

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1 - तुलसी के पत्तो का रस दिन 3 - 4 बार डाले काफी आराम मिलेगा ।

2 - सफेद प्याज का रस आंखों में डालने रतौंधी में काफी आराम मिलता है ।

3 - देसी गाय का मूत्र आंखों में डालने से काफी लाभ होता है।

4 - हरे धनिये का रस आंखों में डालने से काफी लाभ होता है।

5 - आंखों में शुद्ध शहद लगाने से भी काफी आराम मिलता है। 

6 - प्रतिदिन रात्रि विश्राम से पहले त्रिफला चूर्ण का सेवन करें और रात्रि में भिगोये हुये त्रिफला पानी से आंखों को धोयें काफी आराम मिलेगा ।

7 - गुलाब जल में ताजे खीरे का रस और अनार का रस मिलाकर बूंद - बूंद डालने से काफी आराम मिलता है ।


                                        मोतियाबिंद

इस बीमारी में आँखों की पुतली पर सफेदी आ जाती है और रोगी की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है । रोगी किसी भी चीज को स्पष्ट नही देख पाता ।  इस रोग में रोगी रंगों की पहचान करने में भी परेशानी होती है । रात के समय या फिर कम उजाले में चीजो को स्पष्ट रूप से न देख पाना , किसी चीज को देखने पर उस चीज के आस - पास रंग बिरंगे सर्कल बन जाना । मोतियाबिंद से पीड़ित ब्यक्ति को एक आँख में किसी भी वस्तु को देखने पर दो नजर आना । आदि समस्याएं मोतियाबिंद के लक्षण है 
यह रोग अधिकतर बृद्धा अवस्था मे होता है ।
आइये जानते हैं मोतियाबिंद कितने प्रकार के होते है -


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1 - न्यूक्लियर मोतियाबिंद  : यह मोतियाबिंद पहले एक बिंदु की तरह दिखता है , फिर धीरे - धीरे बढ़ने लगता है यह मोतियाबिंद लेंस के ठीक बीच मे होता है जिसके कारण जैसे - जैसे यह विकशित होता है , आंखों की दृष्टि को बाधित करते जाता है ।

2 - जन्मजात मोतियाबिंद :  जन्मजात मोतियाबिंद हमारे पूर्बजों द्वारा प्राप्त होता है , अर्थात जन्मजात मोतियाबिंद को हम अनुवांशिक मोतियाबिंद कह सकते है ।

3 - कार्टिकल मोतियाबिंद : कार्टिकल मोतियाबिंद आँखों के लेंस के किनारो में होने वाला मोतियाबिंद है , इस रोग में आंखों के लेंस के बाहरी किनारे पर सफेद धारिया बनने लगती है जो धीरे - धीरे आंखों के लेंस तक पहुच जाती है जिससे देखने में रुकावट उतपन्न हो जाती है ।

मोतियाबिंद को ठीक करने के लिए कुछ घरेलू उपाय 

1 - सुबह शाम एक गिलास गाजर का रस पीने से मोतियाबिंद में काफी राहत मिलती है ।

2 - रात में पानी में भिगोई हुई लहसुन की कलियों को प्रातः काल उठकर खांए और पानी पियें। मोतियाबिंद में काफी लाभ होगा ।

3 - शुद्ध शहद आँखों मे लगाने से भी काफी लाभ होता है ।

4 - सूखा धनियां, सौंफ और देशी शक्कर बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बनायें और शुबह - शाम जल के साथ सेवन करे काफी राहत मिलेगी ।

5 - अंकुरित गेंहूँ और अंकुरित चना खाने से मोतियाबिंद में काफी लाभ होता है

6 - सफेद प्याज का रस और शहद 1 अनुपात 2 की मात्रा में गुलाब जल में मिलायें , इस दवा को आंखों में डालने से मोतियाबिंद बिल्कुल ठीक हो जाता है ।


दृष्टि शक्ति बढ़ाने के कुछ घरेलू उपाय 



1 - ताजा आंवले का रस , नींबू का रस नेत्र ज्योति बढ़ाने में काफी सहायक होते है अतः इनका सेवन करते रहना चाहिए ।

2 - हरड़ , बहेड़ा , आंवला , मुरेठी , लोहभस्म आदि को समान मात्रा में मिला कर जल में पीस कर सुख ले , इस बने पाउडर को सुबह शहद के साथ लेने से काफी लाभ होता है ।