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शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

Types of disease in hindi / बीमारियों के प्रकार

Types of disease in hindi / बीमारियों के प्रकार


मानव शरीर मे बीमारिया दो प्रकार की होती है एक वे बीमारिया जो किसी जीवाणु (Bacteria) के कारण उत्पन्न होती है , और दूसरी बीमारिया जो हमारे असन्तुलित खान पान के कारण उत्पन्न होती है । आइये बिस्तार से जानते है

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1 वे विमारिया जिनकी उत्तपत्ति किसी जीवाणु , पैथोजन, वायरस, फंगस आदि से होती है , जैसे  क्षय रोग ( टी. बी.) , टायफाईड, टिटेनस, मलेरिया, न्यूमोनिया आदि ।

इन बीमारियों की तीन विशेषताएं हैं -


 (A) इन बीमारियों के कारणों का पता परीक्षणों से आसानी से लगाया जा सकता है ।
(B) इन बीमारियों के कारणों का पता लग जाता है इस लिए इनको ठीक करने की दवाये भी विकसित की जा चुकी है
(C)  इन बीमारियों को जल्द ही अस्थाई रूप से ठीक जा सकती है ।

2 वे जिनकी उत्तपत्ति किसी भी जीवाणु , वायरस , फंगस


आदि से कभी भी नही होती । जैसे - अम्लपित्त (Stomach Acidity) , दमा (Asthma) , गठिया , जोड़ो का दर्द (Arthritis) , कर्क रोग (Cancer) , कब्ज (Constipation),  मधुमेय (Dibetes), हृदय रोग (Heart Problems, Coronary Artery Booking) , बवासीर, भगन्दर, आधासीसी (Migraine) ,  सिर दर्द , प्रोस्टेट आदि
इन बीमारियों की भी तीन विशेषताएं है -
(A) इन बीमारियों के कारणों का पता नही लग पाता ।
(B) क्योकि इन बीमारियों के कारण का पता नही लग पाता , तो इनको ठीक करने की दवा भी विकसित नही की जा सकती।
(C) इनमे से कोई भी बीमारी एक बार हो जाय तो उन ब्यक्ति को बीमारी होने के दिन से ले कर चिता पर लेटने वाले दिन तक औषधि लेनी पड़ती है । इस लिए इन बीमारियों को दीर्घकालीन असाध्य रोगों की ( Chronic ,Long - time, Incurable Diseases) संज्ञा दी गई है।
आज के समय में इन बीमारियों को ठीक करने का जो आधुनिक उपचार उपलब्ध है वह इस प्रकार है ।
जैसे -

1 पेट की अम्लता (Stomach Acidity)


पेट की अम्लता पानी पीने के प्राकृतिक नियमो का पालन न करने से, पाचन तंत्र में किसी खास बिगाड़ व विकारों के कारण उतपन्न होती है । इसे ठीक करने के लिये आधुनिक उपचार के अंतर्गत ब्यक्ति को अल्क़री (क्षार) की गोली दी जाती है । यह क्षार पेट मे जा कर एसिड को नष्ट कर देती है , और हमको लगता है कि हम ठीक हो गये , लेकिन वास्तव में हमारा भारी नुकसान हो जाता है । मतलब जैसे - जैसे आप किसी दवाई द्वारा पेट की एसीडिटी मिटायेंगे वैसे - वैसे पेट एसिड बनाते जायेगा और बीमारी को दीर्घकालीन असाध्य बना देगा । यह समस्या बढ़ते - बढ़ते पेट के अल्सर के रूप में बदल जायेगी और अंत मे कैंसर भी हो सकता है ।

(2) दमा / उच्य रक्तचाप (Asthama, High B.P.)

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ब्लडप्रेशर हो जाने पर ब्यक्ति को ऐसी दवा दी जाती है जिससे रक्तवाहिनियां (blood Vessel) लचीली हो जाएं व उनका ब्यास बढ़ जाए। ब्यास बढ़ जाने पर विज्ञान का दूसरा सिद्धान्त लागू हो जाता है जो इस प्रकार है - force = Pressure/ area ब्यास बढ़ जाने पर Force कम हो जाता है , Force कम हो जाने से उच्च रक्तचाप ( High Blood Pressure) कम हो जाता है । इस दवा से रक्तवाहिनियों का जो कि Elastic  होती है , प्रसरण किया जाता है । रक्तवाहिनियां इलास्टिक होने के कारण 24 घण्टे के भीतर अपने मूल व्यास में आ जाती है । इसलिए चिकित्सक हमें रोज एक गोली लेने की सलाह देते हैं। और अंत में दीर्घकालीन असाध्य बन जाती है ।

(3) हृदय के रक्तवाहिनियों में अवरोध (Coronary Artery Blocking)



हृदय के रक्तवाहिनियों में अवरोध आने पर डॉक्टर लोग बलून एंजियोप्लास्टी करते है , इस क्रिया में रक्तवाहिनी में जिस जगह ब्लाग है उस भाग को फैलाया जाता है । इससे ब्लॉक  तो जस का तस रहता है लेकिन ब्लॉक के बाजू में जगह पैदा की जाती है जिसकी वजह से रक्ताभिसरण शुरू हो जाता है । यहां पर यह बिचार करने की बात है कि ब्लॉक को कोई भी उपचार नही दिया जाता है , व फैलाई हुई रक्तवाहिनी कुछ ही समय में मूल व्यास पर आ जाती है और रक्ताभिसरण रूक जाता है । अब इस अवस्था में चिकित्सक इस ब्लॉक के पास एक स्प्रिंग डाल देते है जिसे स्टेंट कहते हैं। स्टेन्ट डालने के बाद रक्त का प्रवाह उस स्प्रिंग के अंदर से शुरू हो जाता है । इस स्प्रिंग को डालने से 22% व्यक्तियों में फिर से ब्लाक आ जाता है जो Wound healing  व  Foreign Body  के कारण होता है ।

(4) बवासीर , मूलव्याध (Piles)

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 गुदा द्वार के बाहर आए हए मस्सों को शल्य क्रिया द्वारा काट दिया जाता है । यहां पर मूल कारण जो कि गुदाद्वार के अंदर स्थित रक्तवाहिनी व नर्व में होता है, उसे कुछ ना मस्सो को काट देते है जो फिर से बढ़ जाते हैं ।

(5) गठिया, जोड़ो का दर्द ( Arthritis)


इस बीमारी का आधुनिकतम इलाज या तो मरीज को दर्द निवारक औषधि (Pain killer) देना और जब पेन किलर काम करना बंद कर दे तो स्टेरॉइड्स (Steroids) देना जो कि स्वयं में 20 से 25 भयंकर बीमारियों को जन्म देता है

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इस प्रकार आप देखेंगे कि असाध्य बीमारियों के इलाज में बीमारी से उतपन्न होने वाले केवल लक्षणों को ही कुछ समय के लिए दबा दिया जाता है और इसी कारण बीमारी असाध्य और दीर्घकालीन बन जाती है जबकि इनको ठीक करना संभव है ।

दोस्तो अगर देखा जाय तो भगवान ने मनुष्य को सतयुग में जो सरीर दिया था ठीक वही सरीर आज भी है । वही वेग जैसे हँसना, रोना, प्यास आदि , वही संस्थाएं जैसे श्वसन संस्था, रक्ताभिसरण संस्था, मल - मूत्र विसर्जन संस्था आदि बिना किसी अंतर के । जब सतयुग के लोग निरोगी व दीर्घ आयु वाले थे और जीवन के आखरी पल तक स्वावलंबी थे, फिर हम कलियुग के मानवो को इतनी बीमारियाँ क्यों ? हम अल्प आयु के क्यों ?
हम कोई भी मशीन अथवा उपकरण लेते है तो उसका ओपरेटिंग मैनुअल पढ़े बिना उसे नही चलाते , लेकिन यह कैसी विडंबना है कि दुनिया की सबसे जटिल मशीन "मानव देह" जो स्वयं अपने जैसी मशीन को जन्म देने की क्षमता रखती है , को बिना किसी ऑपरेटिंग मैनुअल (गीता, गुरू ग्रंथसाहब, आदि) पढ़े चलाते है





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